जानिए ट्रिपल इनकम का फार्मूला : खेती में इनोवेशन "तालाब के ऊपर मुर्गी, पानी में मछली,बगल में बागवानी… जशपुर के अंकित का मॉडल बना मिसाल
रायपुर। खेती को फायदे का सौदा बनाने के लिए अब सिर्फ पारंपरिक फसल पर निर्भर रहना काफी नहीं है। छत्तीसगढ़ के जशपुर जिले के ग्राम रतबा के युवा किसान अंकित लकड़ा ने इसी सोच को बदलते हुए ऐसा मॉडल तैयार किया है, जिसमें एक ही खेत से कई तरह की आय हो रही है। उन्होंने तालाब के ऊपर मुर्गी पालन, नीचे मछली पालन और किनारों पर बागवानी कर खेती को बहुआयामी बना दिया है।
पहले सिर्फ धान, अब सालभर कमाई
अंकित बताते हैं कि पहले वे सिर्फ बारिश के मौसम में धान की खेती करते थे। बाकी समय खेत खाली रहता था। इसके बाद उन्होंने मत्स्य विभाग से जानकारी लेकर खेत में दो तालाब बनवाए। अब उन्हीं तालाबों के पानी से गर्मियों में भी खेती और बागवानी कर रहे हैं।

तालाब के ऊपर शेड, एक साथ दो काम
अंकित ने अपने तालाबों के ऊपर शेड बनाकर मुर्गी पालन शुरू किया। एक शेड में 1000 से 1200 मुर्गियां रखी जाती हैं। खास बात यह है कि मुर्गियों का अपशिष्ट सीधे तालाब में गिरता है, जो मछलियों के लिए आहार बन जाता है। इससे अलग से फीड का खर्च कम हो जाता है और उत्पादन बढ़ता है।
किनारों पर आम-लीची के पेड़
तालाब के किनारों (मेड़) पर उन्होंने आम और लीची के पेड़ लगाए हैं। इससे दो फायदे हो रहे हैं—एक, मिट्टी का कटाव रुकता है और दूसरा, फलों से अतिरिक्त आय मिलती है। तालाब का पानी ही इन पेड़ों की सिंचाई में काम आता है।
सरकार से मिला 8 लाख का अनुदान
अंकित को प्रधानमंत्री मत्स्य योजना के तहत करीब 8 लाख रुपए का अनुदान मिला। इसके साथ ही पॉन्ड लाइनर, मोटर, पाइप और मछली का फीड भी उपलब्ध कराया गया। इससे शुरुआती लागत का बोझ काफी कम हो गया।

दूसरे किसान भी अपना रहे मॉडल
इसी मॉडल को अपनाने वाले किसान नंदकिशोर पटेल बताते हैं कि शुरुआत में थोड़ा निवेश जरूर करना पड़ता है, लेकिन एक बार सिस्टम सेट हो जाए तो हर महीने नियमित आय होने लगती है। उनका कहना है कि “अब सिर्फ मछली नहीं, मुर्गी पालन से भी आमदनी बढ़ गई है।”
कम लागत में ज्यादा मुनाफा
एकीकृत मछली-सह-मुर्गी पालन प्रणाली कम लागत में दोहरा लाभ देती है। इसमें संसाधनों का बेहतर उपयोग होता है और पर्यावरण पर भी सकारात्मक असर पड़ता है।

सीख क्या है?
अंकित लकड़ा की कहानी यह बताती है कि नई सोच, तकनीक और सरकारी योजनाओं का सही उपयोग कर खेती को घाटे से निकालकर फायदे का सौदा बनाया जा सकता है। अब वे अन्य किसानों के लिए भी प्रेरणा बन रहे हैं।
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